Looking for this song for quite some time now...
बादलों का नाम न हों, अम्बरों के गाव में, दिन भी अंधेरी रात हो,
यही तो है मौसम आओ चले,
तुम और हम, दर्द को बांसुरी बना ले,
थोडासा रुमानी हो जाएँ....
बादलो का नाम न हो अम्बर की छाओ में
जलता हो जंगल खुद अपनी ही छाओं में
येही तो है मौसम
येही तो है मौसम
आओ तुम और हम बारिश के नगमे गुनगुनाये
थोडासा रुमानी हो जाएँ....
मुश्किल है जीना उम्मीद के बिना
थोड़े से सपने सजाये
थोडासा रुमानी हो जाएँ....
बादलों का नाम न हों, अम्बरों के गाव में, दिन भी अंधेरी रात हो,
यही तो है मौसम आओ चले,
तुम और हम, दर्द को बांसुरी बना ले,
थोडासा रुमानी हो जाएँ....
बादलो का नाम न हो अम्बर की छाओ में
जलता हो जंगल खुद अपनी ही छाओं में
येही तो है मौसम
येही तो है मौसम
आओ तुम और हम बारिश के नगमे गुनगुनाये
थोडासा रुमानी हो जाएँ....
मुश्किल है जीना उम्मीद के बिना
थोड़े से सपने सजाये
थोडासा रुमानी हो जाएँ....